किसी दूसरे के ट्रेडमार्क आवेदन का विरोध (ऑपोज़िशन) करने के लिए आपको TM-O फ़ॉर्म में नोटिस ऑफ़ ऑपोज़िशन फ़ाइल करना होता है, और वह भी Trade Marks Journal में उस मार्क के छपने की तारीख से 4 महीने के अंदर। यह समय-सीमा खुद कानून में तय है, इसलिए इसे बढ़ाया नहीं जा सकता। फ़ाइलिंग IP India के ऑनलाइन पोर्टल पर होती है और ऑनलाइन फ़ाइलिंग की सरकारी फ़ीस ₹2,700 प्रति क्लास है।
ट्रेडमार्क ऑपोज़िशन क्या होता है?
जब कोई ट्रेडमार्क के लिए आवेदन करता है, तो रजिस्ट्री का एग्ज़ामिनर उसकी जांच करता है। आवेदन स्वीकार होने के बाद उसे ट्रेडमार्क जर्नल में छापा जाता है, ताकि आम लोग और दूसरे ब्रांड मालिक उसे देख सकें। अगर किसी को लगता है कि यह मार्क रजिस्टर नहीं होना चाहिए, जैसे कि वह आपके ब्रांड की नकल है, तो वह रजिस्ट्रार के सामने लिखित विरोध दर्ज कर सकता है। इसी को ट्रेडमार्क ऑपोज़िशन कहते हैं।
यह 4 महीने की अवधि Trade Marks Act, 1999 की धारा 21 में है, जिसे 2010 के संशोधन ने तय किया था। Trade Marks Rules, 2017 का नियम 42 भी यही कहता है। पुराना "3 महीने + 1 महीने की मोहलत" वाला सिस्टम अब नहीं है।
ऑपोज़िशन को ऑब्जेक्शन न समझें, जो जांच के दौरान एग्ज़ामिनर उठाता है। फ़र्क objection vs opposition गाइड (English) में है।
कौन ऑपोज़िशन फ़ाइल कर सकता है?
धारा 21 के मुताबिक कोई भी व्यक्ति ऑपोज़िशन फ़ाइल कर सकता है। इसके लिए न रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क ज़रूरी है, न नाम का पहले से इस्तेमाल, और न ही आवेदक का कॉम्पिटिटर होना। कोई ग्राहक या ट्रेड संस्था भी विरोध कर सकती है।
अगर आप अपने बिना रजिस्ट्रेशन वाले ब्रांड के आधार पर विरोध कर रहे हैं, तो पहले से इस्तेमाल के तारीख वाले सबूत सबसे अहम हैं।
किन कारणों पर ऑपोज़िशन होता है?
ऑपोज़िशन के कारण (ग्राउंड्स) ज़्यादातर Trade Marks Act की धारा 9 और धारा 11 से आते हैं। आम ग्राउंड्स ये हैं:
- पहले वाले मार्क से मिलता-जुलता: नया मार्क आपके पहले के ट्रेडमार्क जैसा दिखता या सुनाई देता है, और सामान या सेवाएं भी वही या मिलती-जुलती हैं, जिससे ग्राहक कन्फ्यूज़ हो सकते हैं (धारा 11)।
- पासिंग ऑफ़: आपका बिना रजिस्ट्रेशन वाला ब्रांड पहले से बाज़ार में चल रहा है और नए मार्क से ग्राहक दूसरे के सामान को आपका समझ सकते हैं, यानी उसके इस्तेमाल को पासिंग ऑफ़ के कानून से रोका जा सकता है (धारा 11)।
- मशहूर (well-known) ट्रेडमार्क की नकल (धारा 11)।
- अपनी पहचान न होना: मार्क सिर्फ़ सामान की किस्म या क्वालिटी बताने वाला आम शब्द है (धारा 9)।
- गुमराह करने वाला मार्क: ऐसा मार्क जिससे लोग धोखा खा सकते हैं या कन्फ्यूज़ हो सकते हैं (धारा 9)।
दो नाम कब "मिलते-जुलते" माने जाते हैं, यह deceptively similar गाइड (English) में है। स्पेलिंग और आवाज़ की शुरुआती तुलना सिमिलैरिटी चेकर (English) से कर सकते हैं; यह कानूनी फ़ैसला नहीं है।
TM-O फ़ाइल करने का तरीका
1. जर्नल की डिटेल नोट करें
जिस मार्क का विरोध करना है, उसका एप्लिकेशन नंबर, क्लास, जर्नल नंबर और जर्नल की तारीख लिख लें। जर्नल पढ़ने का तरीका ट्रेडमार्क जर्नल गाइड में है।
2. आखिरी तारीख निकालें
जर्नल की पब्लिकेशन डेट में 4 महीने जोड़ें। जैसे, सोमवार 2 नवंबर 2026 के जर्नल में छपे मार्क के लिए अनुमानित आखिरी तारीख मंगलवार 2 मार्च 2027 होगी। हमारा ऑपोज़िशन डेडलाइन कैलकुलेटर भी अनुमानित आखिरी तारीख और बचे हुए दिन बताता है। ये तारीखें अनुमान हैं, इसलिए ऑफ़िशियल जर्नल में तारीख की पुष्टि ज़रूर करें। IP India के ड्राफ़्ट मैनुअल के मुताबिक ऑनलाइन फ़ाइलिंग पर छुट्टी वाली छूट नहीं मिलती, इसलिए आखिरी तारीख से पहले ही ऑनलाइन फ़ाइल करें।
3. सबूत इकट्ठा करें
ये चीज़ें तैयार रखें:
- अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट या आवेदन नंबर, अगर है
- ब्रांड के इस्तेमाल के सबूत: तारीख वाले बिल, इनवॉइस, पैकेजिंग और विज्ञापन
- वेबसाइट, सोशल मीडिया या मार्केटप्लेस लिस्टिंग के तारीख वाले स्क्रीनशॉट
- सालाना बिक्री के आंकड़े, अगर आपके पास हैं
4. नोटिस ऑफ़ ऑपोज़िशन तैयार करें
नोटिस में साफ़ लिखें कि आप कौन हैं, आपका मार्क क्या है, वह कब से इस्तेमाल हो रहा है और आप किन ग्राउंड्स पर विरोध कर रहे हैं। नियम 43 के अनुसार नोटिस के नीचे विरोध करने वाले व्यक्ति या उसके ऑथराइज़्ड एजेंट का वेरिफ़िकेशन होना चाहिए।
5. ऑनलाइन फ़ाइल करें और फ़ीस भरें
IP India के ट्रेडमार्क ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें, TM-O फ़ॉर्म चुनें, डिटेल भरें, डिजिटल सिग्नेचर (DSC) या ई-साइन से साइन करें और फ़ीस जमा करें।
| फ़ाइलिंग का तरीका | सरकारी फ़ीस (हर क्लास के लिए) |
|---|---|
| ऑनलाइन (ई-फ़ाइलिंग) | ₹2,700 |
| फ़िज़िकल (कागज़ी) | ₹3,000 |
जितनी क्लास में आप विरोध करेंगे, हर क्लास की फ़ीस अलग लगेगी। यह रेट सभी के लिए एक ही है, यानी स्टार्टअप या छोटे कारोबार को TM-O पर कोई छूट नहीं मिलती। एजेंट या वकील की प्रोफ़ेशनल फ़ीस इससे अलग होती है। फ़ाइल करने से पहले IP India की फ़ीस लिस्ट पर मौजूदा फ़ीस एक बार देख लें।
फ़ाइल करने के बाद क्या होता है?
रजिस्ट्री आपके नोटिस की कॉपी आवेदक को भेजती है। इसके बाद केस आम तौर पर इन स्टेज से गुज़रता है:
| स्टेज | कौन करता है | समय-सीमा |
|---|---|---|
| काउंटर स्टेटमेंट (TM-O) | आवेदक | नोटिस की कॉपी मिलने से 2 महीने |
| सबूत (एफ़िडेविट) | आप, यानी ऑपोज़िशन करने वाले | काउंटर स्टेटमेंट मिलने से 2 महीने |
| सबूत (एफ़िडेविट) | आवेदक | आपके सबूत मिलने से 2 महीने |
| जवाबी सबूत | आप | आवेदक के सबूत मिलने से 1 महीना |
| सुनवाई और फ़ैसला | रजिस्ट्रार | सबूत पूरे होने के बाद, कम से कम 1 महीने के नोटिस पर |
ये डेडलाइन सख़्त हैं, इन्हें बढ़वाने के भरोसे न रहें। तीन बातें खास ध्यान रखें:
- अगर आवेदक 2 महीने में काउंटर स्टेटमेंट नहीं देता, तो उसका आवेदन छोड़ा हुआ (abandoned) माना जाता है (धारा 21)। यह समय भी नहीं बढ़ता।
- अगर आप 2 महीने में न अपने सबूत देते हैं और न ही लिखकर बताते हैं कि आप नोटिस में लिखी बातों पर ही भरोसा करेंगे, तो आपका ऑपोज़िशन छोड़ा हुआ माना जाता है (नियम 45)।
- इसी तरह आवेदक भी 2 महीने में न सबूत दे और न काउंटर स्टेटमेंट पर भरोसा करने की बात लिखकर बताए, तो उसका आवेदन छोड़ा हुआ माना जाता है (नियम 46)।
अगर आपके अपने ट्रेडमार्क के खिलाफ़ ऑपोज़िशन आया है, तो काउंटर स्टेटमेंट गाइड (English) पढ़ें।
फ़ाइल करने से पहले छोटी चेकलिस्ट
- एप्लिकेशन नंबर, क्लास और जर्नल की तारीख नोट कर ली
- अनुमानित आखिरी तारीख निकाली, ऑफ़िशियल जर्नल से उसकी पुष्टि की और उससे कुछ हफ़्ते पहले का रिमाइंडर लगाया
- अपने ब्रांड के इस्तेमाल के तारीख वाले सबूत जुटाए
- ग्राउंड्स तय किए (धारा 9 या धारा 11)
- हर क्लास की फ़ीस, ई-फ़ाइलिंग अकाउंट और DSC या ई-साइन तैयार है
- ज़रूरत हो तो किसी रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क एजेंट या एडवोकेट से ड्राफ़्ट चेक करवाया
4 महीने निकल गए तो?
अगर 4 महीने में कोई ऑपोज़िशन नहीं आता, तो आवेदन आम तौर पर रजिस्ट्रेशन की तरफ़ बढ़ जाता है। फिर उसे हटवाने के लिए रेक्टिफ़िकेशन (धारा 57) जैसा रास्ता बचता है, जो ज़्यादा लंबा और महंगा है।
BrandKavach हमें मिलने वाले हर नए जर्नल अंक को चेक करता है और आपके ब्रांड से मिलते-जुलते संभावित नाम, अनुमानित आखिरी तारीख के साथ, ईमेल पर बताता है। ऑपोज़िशन करना है या नहीं, यह फ़ैसला आप खुद या अपने एजेंट के साथ लेते हैं; BrandKavach आपकी तरफ़ से ऑपोज़िशन फ़ाइल नहीं करता। जर्नल पर नज़र रखने का काम सौंपना चाहें, तो अपने ब्रांड की वॉच शुरू करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ट्रेडमार्क ऑपोज़िशन कितने समय में फ़ाइल करना होता है?
ट्रेडमार्क जर्नल में मार्क छपने की तारीख से 4 महीने के अंदर। यह समय Trade Marks Act की धारा 21 में ही तय है (2010 के संशोधन के बाद), इसलिए रजिस्ट्रार इसे नहीं बढ़ा सकता।
TM-O फ़ॉर्म की सरकारी फ़ीस कितनी है?
IP India की फ़ीस लिस्ट के अनुसार ऑनलाइन फ़ाइलिंग पर ₹2,700 और फ़िज़िकल फ़ाइलिंग पर ₹3,000, हर उस क्लास के लिए जिसमें आप विरोध कर रहे हैं। यह रेट सभी के लिए एक ही है, और एजेंट या वकील की प्रोफ़ेशनल फ़ीस अलग होती है।
मेरा ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड नहीं है, क्या मैं फिर भी ऑपोज़िशन कर सकता हूं?
हां। धारा 21 के अनुसार कोई भी व्यक्ति ऑपोज़िशन फ़ाइल कर सकता है, इसके लिए रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क ज़रूरी नहीं है। अगर आप अपने बिना रजिस्ट्रेशन वाले ब्रांड के आधार पर विरोध कर रहे हैं, तो पहले से इस्तेमाल के तारीख वाले सबूत आपका केस मज़बूत बनाते हैं।
ऑपोज़िशन फ़ाइल करने के बाद क्या होता है?
आवेदक को नोटिस की कॉपी मिलने के 2 महीने के अंदर काउंटर स्टेटमेंट देना होता है, नहीं तो उसका आवेदन छोड़ा हुआ (abandoned) माना जाता है। इसके बाद दोनों तरफ़ से सबूत, सुनवाई और फिर रजिस्ट्रार का फ़ैसला होता है।
क्या ऑपोज़िशन के लिए वकील ज़रूरी है?
कानूनन आप खुद भी फ़ाइल कर सकते हैं, लेकिन ऑपोज़िशन एक कानूनी कार्यवाही है जो लंबी चलती है। ग्राउंड्स और सबूत सही तरीके से रखने के लिए रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क एजेंट या एडवोकेट की मदद लेना बेहतर है।
संबंधित गाइड
स्रोत
यह गाइड सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। तारीखें आधिकारिक ट्रेड मार्क्स जर्नल में जांचें और अपने मामले के लिए किसी ट्रेडमार्क एजेंट या वकील से बात करें।