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ट्रेडमार्क रिन्यूअल कैसे करें? TM-R फ़ीस और डेडलाइन

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भारत में रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क 10 साल तक वैलिड रहता है, और ये 10 साल आवेदन की तारीख से गिने जाते हैं। रिन्यूअल के लिए IP India के ऑनलाइन पोर्टल पर TM-R फ़ॉर्म भरना होता है, जो एक्सपायरी से 1 साल पहले से फ़ाइल किया जा सकता है। ऑनलाइन फ़ाइलिंग की सरकारी फ़ीस ₹9,000 प्रति क्लास है। देर होने पर सरचार्ज लगता है, और एक्सपायरी के 1 साल बाद मार्क बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

ट्रेडमार्क कितने साल तक वैलिड रहता है?

Trade Marks Act, 1999 की धारा 25 के अनुसार रजिस्ट्रेशन 10 साल के लिए होता है, और इसे हर बार 10 साल के लिए रिन्यू कराया जा सकता है। धारा 23 कहती है कि ट्रेडमार्क आवेदन की तारीख से ही रजिस्टर्ड माना जाता है। इसका मतलब:

  • 10 साल आवेदन की तारीख से गिने जाते हैं, सर्टिफ़िकेट मिलने की तारीख से नहीं।
  • जैसे, मार्च 2017 में फ़ाइल हुआ मार्क मार्च 2027 में एक्सपायर होगा, भले ही उसका सर्टिफ़िकेट 2019 में मिला हो।
  • हर रिन्यूअल पिछली एक्सपायरी की तारीख से अगले 10 साल के लिए होता है, यानी जल्दी रिन्यू कराने से आपके दिन कम नहीं होते।

अपनी अनुमानित तारीखें निकालने के लिए रिन्यूअल डेट कैलकुलेटर (English) इस्तेमाल करें, और असली एक्सपायरी तारीख IP India के ऑफ़िशियल रिकॉर्ड (एप्लिकेशन स्टेटस) से पक्की करें।

रिन्यूअल की टाइमलाइन और सरकारी फ़ीस

कब क्या करना होगा सरकारी फ़ीस (ऑनलाइन, हर क्लास)
एक्सपायरी से 1 साल पहले से एक्सपायरी तक सामान्य रिन्यूअल (TM-R) ₹9,000
एक्सपायरी के बाद 6 महीने तक सरचार्ज के साथ रिन्यूअल (TM-R) ₹9,000 + ₹4,500 सरचार्ज = ₹13,500
एक्सपायरी के 6 महीने बाद से 1 साल तक रिस्टोरेशन और रिन्यूअल (TM-R), रजिस्ट्रार की मंज़ूरी पर ₹9,000 + ₹9,000 = ₹18,000

कुछ ज़रूरी बातें:

  • फ़िज़िकल (कागज़ी) फ़ाइलिंग पर यही फ़ीस ₹10,000, ₹15,000 और ₹20,000 बनती है।
  • फ़ीस हर क्लास के लिए अलग लगती है, और यह रेट सभी के लिए एक है। यानी स्टार्टअप या छोटे कारोबार को रिन्यूअल पर कोई छूट नहीं है।
  • एजेंट या वकील की प्रोफ़ेशनल फ़ीस इससे अलग होती है।
  • फ़ाइल करने से पहले IP India की फ़ीस लिस्ट पर मौजूदा फ़ीस ज़रूर देख लें।

6 महीने के बाद क्या होता है? सरचार्ज वाली मोहलत खत्म होने पर रजिस्ट्रार मार्क को रजिस्टर से हटा सकता है, और इसकी सूचना जर्नल में छपती है। इसके बाद एक्सपायरी से 1 साल के अंदर रिस्टोरेशन मांगा जा सकता है (धारा 25(4) और नियम 60), लेकिन यह रजिस्ट्रार की मर्ज़ी पर है। रजिस्ट्रार देखता है कि ऐसा करना ठीक है या नहीं, और दूसरों के हितों पर भी ध्यान देता है। 1 साल के बाद TM-R से रिस्टोरेशन का यह रास्ता नहीं रहता। कुछ मामलों में अदालतों ने बाद में भी मार्क बहाल करवाया है, जैसे जब रजिस्ट्री ने एक्सपायरी से पहले ज़रूरी नोटिस नहीं भेजा था, पर हर बार ऐसा नहीं होता। इस हालत में किसी रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क एजेंट या एडवोकेट से बात करें।

TM-R से ऑनलाइन रिन्यूअल कैसे करें

1. ज़रूरी डिटेल इकट्ठा करें

एप्लिकेशन या रजिस्ट्रेशन नंबर, क्लास और एक्सपायरी की तारीख। ये रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट पर होते हैं, और IP India की वेबसाइट पर एप्लिकेशन नंबर से स्टेटस भी देखा जा सकता है।

2. मालिक और पते की डिटेल मिलाएं

अगर कंपनी का नाम, मालिक या पता बदल गया है, तो रजिस्ट्री का रिकॉर्ड भी अपडेट करवाना होगा। इसके लिए अलग अनुरोध और फ़ीस होती है, इसलिए ऐसे मामले में एजेंट की मदद लेना आसान रहता है।

3. ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें

IP India के ट्रेडमार्क ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें। अकाउंट न हो, तो पहले साइन-अप करें। फ़ॉर्म साइन करने के लिए डिजिटल सिग्नेचर (DSC) या ई-साइन चाहिए।

4. TM-R भरें और फ़ीस जमा करें

फ़ॉर्म में एप्लिकेशन नंबर डालें, अपनी स्थिति के हिसाब से सही विकल्प चुनें (सामान्य रिन्यूअल, सरचार्ज के साथ रिन्यूअल या रिस्टोरेशन) और हर क्लास की फ़ीस ऑनलाइन जमा करें।

5. रसीद संभालें और स्टेटस देखें

सबमिट करने के बाद मिली रसीद (acknowledgement) संभालकर रखें। कुछ समय बाद IP India की वेबसाइट पर स्टेटस चेक करें कि रिकॉर्ड में नई एक्सपायरी तारीख दिख रही है या नहीं।

रजिस्ट्री के नोटिस के भरोसे न रहें

अगर रिन्यूअल फ़ाइल नहीं हुआ है, तो रजिस्ट्री एक्सपायरी से पहले (ज़्यादा से ज़्यादा 6 महीने पहले) मालिक को RG-3 फ़ॉर्म में नोटिस भेजती है (नियम 58)। लेकिन रिकॉर्ड में पुराना पता या ईमेल हो, तो हो सकता है यह नोटिस आप तक पहुंचे ही नहीं, और नोटिस न मिलने से एक्सपायरी की तारीख नहीं बदलती। इसलिए अपना रिमाइंडर खुद लगाएं: एक्सपायरी से 1 साल पहले (जब रिन्यूअल खुलता है) और फिर 3 महीने पहले।

रिन्यूअल से पहले छोटी चेकलिस्ट

  • एक्सपायरी की तारीख आवेदन की तारीख से गिनी
  • सभी क्लास की लिस्ट बनाई, क्योंकि हर क्लास की फ़ीस अलग है
  • मालिक का नाम और पता रिकॉर्ड से मिलाया
  • ई-फ़ाइलिंग अकाउंट और DSC या ई-साइन तैयार है
  • मौजूदा फ़ीस IP India की वेबसाइट पर चेक की
  • रसीद और रिन्यूअल का रिकॉर्ड संभालकर रखा

आम गलतियां

  • सर्टिफ़िकेट की तारीख से 10 साल गिनना। गिनती आवेदन की तारीख से होती है।
  • आखिरी हफ़्ते तक टालना। जल्दी रिन्यू कराने में कोई नुकसान नहीं, क्योंकि नई अवधि पिछली एक्सपायरी से ही शुरू होती है।
  • कुछ क्लास भूल जाना। अगर मार्क कई क्लास में रजिस्टर्ड है, तो हर क्लास का रिन्यूअल और फ़ीस देखें।
  • रिन्यूअल को ही पूरी सुरक्षा मान लेना। रिन्यूअल आपके रजिस्ट्रेशन को ज़िंदा रखता है, लेकिन कोई मिलता-जुलता नया मार्क फ़ाइल करे, तो उसे पकड़ने के लिए ट्रेडमार्क वॉच चाहिए।

रिन्यूअल के बाद भी नज़र रखें

रिन्यूअल की तारीख के लिए ऊपर बताए रिमाइंडर खुद लगाएं। मिलते-जुलते नए आवेदनों पर नज़र रखने के लिए BrandKavach हमें मिलने वाले हर नए जर्नल अंक को चेक करता है और संभावित नाम, ऑपोज़िशन की अनुमानित आखिरी तारीख के साथ, ईमेल पर बताता है। यह आपकी तरफ़ से TM-R या ऑपोज़िशन फ़ाइल नहीं करता। यह काम सौंपना चाहें, तो अपने ब्रांड की वॉच शुरू करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ट्रेडमार्क कितने साल के लिए वैलिड होता है?

भारत में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन 10 साल के लिए होता है, जो आवेदन की तारीख से गिने जाते हैं, सर्टिफ़िकेट की तारीख से नहीं। इसके बाद इसे हर बार 10 साल के लिए रिन्यू कराया जा सकता है।

ट्रेडमार्क रिन्यूअल कितने पहले करा सकते हैं?

एक्सपायरी से 1 साल पहले से TM-R फ़ॉर्म फ़ाइल किया जा सकता है (Trade Marks Rules, 2017 का नियम 57)। आखिरी महीनों तक इंतज़ार न करें।

ट्रेडमार्क रिन्यूअल की सरकारी फ़ीस कितनी है?

IP India की फ़ीस लिस्ट के अनुसार ऑनलाइन फ़ाइलिंग पर ₹9,000 और फ़िज़िकल फ़ाइलिंग पर ₹10,000, हर क्लास के लिए। यह रेट सभी के लिए एक है, और एजेंट या वकील की प्रोफ़ेशनल फ़ीस अलग होती है।

एक्सपायरी की तारीख निकल गई, अब क्या करें?

एक्सपायरी के 6 महीने के अंदर सरचार्ज के साथ TM-R फ़ाइल करके रिन्यूअल हो सकता है। 6 महीने के बाद और 1 साल के अंदर रिस्टोरेशन के लिए TM-R फ़ाइल होता है, जो रजिस्ट्रार की मंज़ूरी पर निर्भर है; ऐसे मामले में किसी रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क एजेंट या एडवोकेट से सलाह लें।

क्या रिन्यूअल के लिए वकील ज़रूरी है?

नहीं, रजिस्टर्ड मालिक खुद भी ऑनलाइन TM-R फ़ाइल कर सकता है। अगर मालिक या पता बदला है, या मार्क रजिस्टर से हट चुका है, तो किसी एजेंट या एडवोकेट की मदद लेना बेहतर है।

संबंधित गाइड

स्रोत

यह गाइड सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। तारीखें आधिकारिक ट्रेड मार्क्स जर्नल में जांचें और अपने मामले के लिए किसी ट्रेडमार्क एजेंट या वकील से बात करें।